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नैमिषारण्य (Naimisharanya) उत्तर प्रदेश के सीतापुर ज़िले में स्थित एक अत्यंत पवित्र तीर्थस्थान है, जिसे सतयुग से भी प्राचीन माना जाता है। कहा जाता है कि यही वह स्थान है जहाँ ऋषि-मुनियों ने 88,000 यज्ञ किए थे और जहाँ भगवान विष्णु का चक्र गिरा था — इसलिए इसे चक्रतीर्थ भी कहा जाता है।

यहाँ घूमने और दर्शन करने के लिए कई प्रमुख धार्मिक स्थल हैं 👇

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🌿 नैमिषारण्य में घूमने की प्रमुख जगहें

1. चक्रतीर्थ (Chakra Tirth)

  • नैमिषारण्य का सबसे पवित्र स्थल।
  • कहा जाता है कि भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र यहीं पृथ्वी पर गिरा था।
  • यहाँ एक गहरी जलकुंड है, जहाँ श्रद्धालु स्नान कर पवित्रता प्राप्त करते हैं।

2. ललिता देवी मंदिर

  • 51 शक्तिपीठों में से एक।
  • कहा जाता है कि माता सती का हृदय यहीं गिरा था।
  • मंदिर की सुंदरता और आस्था दोनों अद्भुत हैं।

3. हनुमान गढ़ी

  • भगवान हनुमान को समर्पित यह मंदिर ऊँचाई पर स्थित है।
  • यहाँ से नैमिषारण्य का सुंदर दृश्य दिखाई देता है।

4. दशाश्वमेध घाट

  • यह गंगा के घाटों जैसा नहीं है, लेकिन यहाँ पवित्र सरोवर के किनारे पूजा और स्नान किया जाता है।

5. व्यास गद्दी

  • जहाँ वेदव्यास जी ने महाभारत और अठारह पुराणों की रचना की थी।
  • यहाँ एक छोटा मंदिर और ध्यान स्थल है।

6. सूतजी आश्रम (Sutji Ashram)

  • जहाँ सूतजी ऋषि ने ऋषियों को भागवत कथा सुनाई थी।
  • यह स्थान धार्मिक प्रवचनों के लिए प्रसिद्ध है।

7. दधीचि कुंड

  • महर्षि दधीचि ने यहाँ अपनी अस्थियाँ दान की थीं ताकि देवताओं को वज्र बनाने में मदद मिले।
  • यह स्थान त्याग और बलिदान का प्रतीक माना जाता है।

8. पांडव किला

  • कहा जाता है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के समय यहाँ कुछ समय बिताया था।
  • किला ऐतिहासिक और पुराणिक दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण है।

🌸 अन्य दर्शनीय स्थल

  • सुदर्शन आश्रम – शांति और ध्यान का स्थान।
  • रामकुंड – धार्मिक स्नान के लिए प्रसिद्ध।
  • कैलाश भवन मंदिर – भगवान शिव को समर्पित प्राचीन मंदिर।

🧭 घूमने का सबसे अच्छा समय

  • अक्टूबर से मार्च तक का मौसम सबसे सुखद होता है।
  • पूर्णिमा और अमावस्या के दिन यहाँ विशेष स्नान और मेला लगता है।

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