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वृन्दावन घुमने की पूरी जानकारी ( Complete information about visiting Vrindavan )

1. वृंदावन: जहां कण-कण में राधा हैं

वृंदावन, उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित एक ऐसी पावन नगरी है जहाँ की हवाओं में आज भी बाँसुरी की तान और पायल की झंकार महसूस की जा सकती है। यह वह स्थान है जहाँ भगवान कृष्ण ने अपनी बचपन की लीलाएं रचीं और रास रचाया। यहाँ आने वाला हर व्यक्ति चाहे वह किसी भी मजहब या देश का हो, यहाँ के रंग में रंग ही जाता है।

2. वृन्दावन जाने का सही समय जाने कोन सा है

वृंदावन की यात्रा के लिए मौसम का ध्यान रखना बहुत जरूरी है:

  • सर्दियों में (अक्टूबर से मार्च): यह सबसे सुखद समय है। मौसम ठंडा होता है, जिससे आप पैदल चलकर मंदिरों के दर्शन आसानी से कर सकते हैं।
  • होली के समय (मार्च): अगर आप दुनिया की सबसे भव्य होली देखना चाहते हैं, तो फाल्गुन के महीने में आएं। लेकिन ध्यान रहे, इस समय भीड़ अत्यधिक होती है।
  • जन्माष्टमी (अगस्त/सितंबर): कान्हा के जन्मदिन पर पूरा शहर रोशनी से नहाया होता है, हालांकि गर्मी और उमस थोड़ी परेशान कर सकती है।

3. यंहा पहुचने के लिए हमें ये साधन अपनाने चाइये

  • रेल मार्ग: सबसे नजदीकी मुख्य स्टेशन मथुरा जंक्शन (MTJ) है। यहाँ से वृंदावन मात्र 10-12 किलोमीटर है। आप स्टेशन के बाहर से ऑटो या ई-रिक्शा ले सकते हैं (किराया ₹20-30 प्रति सवारी)।
  • सड़क मार्ग: दिल्ली-NCR से आने वालों के लिए ‘यमुना एक्सप्रेसवे’ सबसे बेहतरीन है। दिल्ली से मात्र 3-4 घंटे में आप यहाँ पहुँच सकते हैं।
  • हवाई मार्ग: नजदीकी हवाई अड्डा आगरा है, लेकिन दिल्ली (IGI) एयरपोर्ट से ज्यादा बेहतर कनेक्टिविटी मिलती है।

4. आओ जाने वृंदावन के प्रमुख मंदिर (जहाँ मत्था टेकना जरूरी है)

वृंदावन में 5,000 से भी ज्यादा मंदिर हैं, लेकिन कुछ मंदिर आपकी लिस्ट में जरूर होने चाहिए:

बांके बिहारी मंदिर (जिसे Vrindavan का दिल कहा जाता है)

वृन्दावन का प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर जहाँ भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ रहती है

यहाँ के ठाकुर जी बड़े नटखट हैं। यहाँ कोई घंटी नहीं बजती क्योंकि माना जाता है कि बिहारी जी को शोर पसंद नहीं है। यहाँ हर दो मिनट में पर्दा डाला और खोला जाता है, ताकि आप बिहारी जी से अपनी नजरें न मिला सकें (कहावत है कि उनकी नजरें इतनी सम्मोहक हैं कि भक्त उन्हें देखते-देखते उनके साथ ही चल देता है)।

  • समय: सुबह 7:45 से 12:00 और शाम 5:30 से 9:30 (समय मौसम के अनुसार बदलता रहता है)।

प्रेम मंदिर (सफेद संगमरमर का जादू)

प्रेम मंदिर वृन्दावन का सुंदर दृश्य, सफेद संगमरमर से बना भव्य मंदिर और रात की रोशनी

जगद्गुरु कृपालु जी महाराज द्वारा निर्मित यह मंदिर आधुनिक वास्तुकला का बेजोड़ नमूना है। रात के समय जब मंदिर की लाइटें रंग बदलती हैं, तो ऐसा लगता है मानो साक्षात स्वर्ग धरती पर उतर आया हो। यहाँ का ‘म्यूजिकल फाउंटेन’ शाम 7:00 बजे जरूर देखें।

इस्कॉन मंदिर (अंग्रेजों के मंदिर)

इस्कॉन मंदिर वृन्दावन में श्रीकृष्ण और राधा रानी का भव्य मंदिर और भक्तिमय वातावरण

इसे ‘कृष्ण-बलराम मंदिर’ भी कहते हैं। यहाँ की साफ-सफाई, फूलों की सजावट और विदेशी भक्तों द्वारा किया जाने वाला ‘हरे कृष्णा’ कीर्तन आपको झूमने पर मजबूर कर देगा। यहाँ का वातावरण बहुत ही शांत और दिव्य है।

निधिवन (रहस्यमयी कुंज)

निधिवन वृन्दावन का रहस्यमयी वन, जहाँ श्रीकृष्ण की रासलीला से जुड़ी मान्यताएँ हैं

निधिवन के बारे में मान्यता है कि यहाँ आज भी हर रात श्रीकृष्ण और राधा रानी रास रचाते हैं। यहाँ के पेड़ नीचे की ओर झुके हुए हैं और आपस में गुंथे हुए हैं। शाम की आरती के बाद यहाँ परिंदा भी पर नहीं मारता; मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और सभी जीव-जंतु भी बाहर चले जाते हैं।

राधा रमण मंदिर

राधारमण मंदिर वृन्दावन का प्राचीन मंदिर जहाँ स्वयं प्रकट श्रीकृष्ण की पूजा होती है

यह उन दुर्लभ मंदिरों में से है जहाँ श्री कृष्ण की स्वयंभू (अपने आप प्रकट हुई) मूर्ति है। यहाँ की रसोई में 500 से अधिक वर्षों से अग्नि जल रही है, जो कभी बुझाई नहीं गई। यहाँ का प्रसाद और आरती बहुत खास होती है।

श्री राधा वल्लभ मंदिर

वृन्दावन स्थित श्री राधा वल्लभ मंदिर का दिव्य दृश्य, राधा रानी की प्रधान उपासना और भक्तिमय वातावरण

यह मंदिर अपने ‘हित’ परंपरा के लिए जाना जाता है। यहाँ दर्शन बहुत ही सादगी और प्रेम भरे होते हैं।


5. यंहा क्या करें और कैसे घुमे आपको सब बताता हूँ (An Authentic Experience)

वृंदावन की परिक्रमा

वृंदावन परिक्रमा मार्ग पर भक्त पैदल यात्रा करते हुए, चारों ओर मंदिर और आध्यात्मिक वातावरण

यदि आप शारीरिक रूप से सक्षम हैं, तो 12 किलोमीटर की वृंदावन परिक्रमा जरूर करें। यह परिक्रमा ‘इस्कॉन मंदिर’ या ‘केश घाट’ से शुरू की जा सकती है। सुबह 4:00 बजे (ब्रह्म मुहूर्त) में भक्तों के साथ “राधे-राधे” बोलते हुए चलना एक आध्यात्मिक रिचार्ज की तरह है।

केसी घाट पर यमुना आरती

वृन्दावन के केसी घाट पर यमुना नदी की संध्या आरती, दीपों की रोशनी और भक्तिमय वातावरण का सुंदर दृश्य

शाम के समय केसी घाट पर मां यमुना की आरती होती है। नदी के किनारे दीयों की रोशनी और मंत्रोच्चार के बीच बैठना आपको एक अलग ही शांति देगा। आप नाव की सवारी (Boating) भी कर सकते हैं।

ब्रज का स्वाद (Food Guide)

वृंदावन में रहकर अगर आपने स्वाद नहीं चखा, तो यात्रा अधूरी है:

  • सुबह का नाश्ता: ‘बृजवासी’ या स्थानीय दुकानों पर ‘बेड़मी पूरी और आलू की सब्जी’ के साथ ‘जलेबी’।
  • लस्सी: यहाँ की गाढ़ी लस्सी, जिसके ऊपर मलाई की मोटी परत होती है, वह भी कुल्हड़ में।
  • पेड़ा: मथुरा और वृंदावन के पेड़े दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं।
  • चाट: ‘अतरौली वाले की चाट’ या गलियों में मिलने वाली टिक्की-भल्ला।
  • सात्विक भोजन: इस्कॉन मंदिर के ‘गोविंदा रेस्टोरेंट’ में आप बिना प्याज-लहसुन का स्वादिष्ट शाही भोजन कर सकते हैं।

6. सबसे जरुरी-ठहरने की व्यवस्था (Accommodation)

वृंदावन में हर बजट के लिए जगह है:

  1. आश्रम: अगर आप शांति चाहते हैं, तो ‘फोगला आश्रम’ या ‘जयपुरिया भवन’ जैसे आश्रमों में रुक सकते हैं। इनका किराया ₹500 से ₹1000 के बीच होता है।
  2. होटल्स: प्रेम मंदिर के आसपास कई अच्छे होटल्स हैं (जैसे- नटराज, अनंता)। इनका किराया ₹2000 से ₹5000 तक हो सकता है।
  3. धर्मशाला: सस्ते विकल्प के रूप में बहुत सारी धर्मशालाएं उपलब्ध हैं।

7.आपको ये सावधानियां जरुर करनी चाइये (Pro-Tips)

वृंदावन में आनंद के साथ-साथ कुछ बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है:

  • बंदरों का आतंक: वृंदावन के बंदर बहुत शातिर हैं। वे मुख्य रूप से आपका चश्मा, मोबाइल और खाने की थैली छीन लेते हैं। चश्मा पहनने वाले लोग उसे जेब में रखें या स्ट्रैप लगा लें। अगर बंदर कुछ छीन ले, तो उसे फ्रूटी (Frooti) का लालच देकर आप अपना सामान वापस पा सकते हैं।
  • गाइडों से बचें: कई लोग आपको ‘विशेष पूजा’ या ‘शॉर्टकट दर्शन’ के नाम पर ठगने की कोशिश करेंगे। मंदिर में दान केवल आधिकारिक रसीद काउंटर पर ही दें।
  • ई-रिक्शा का चुनाव: शहर की गलियां बहुत तंग हैं। अपनी कार पार्किंग में खड़ी करें और ई-रिक्शा (₹10-20 सवारी) का उपयोग करें। जाने से पहले किराया तय कर लें।
  • मंदिरों का समय: वृंदावन के मंदिर दोपहर 12:00 से शाम 4:30/5:00 बजे तक बंद रहते हैं। इस समय को अपने लंच और आराम के लिए रखें।

8. आस-पास की अन्य जगहें

अगर आपके पास 2-3 दिन का समय है, तो आप ये भी देख सकते हैं:

  • मथुरा: कृष्ण जन्मभूमि मंदिर और द्वारकाधीश मंदिर।
  • गोवर्धन: गिरिराज पर्वत की 21 किमी की परिक्रमा।
  • बरसाना और नंदगाँव: राधा रानी का महल और कान्हा का गाँव।

9. एक आदर्श 2-दिवसीय यात्रा योजना (Itinerary)

पहला दिन:

  • सुबह: मथुरा पहुंचें, जन्मभूमि दर्शन करें।
  • दोपहर: वृंदावन चेक-इन और लंच।
  • शाम: इस्कॉन मंदिर, फिर पैदल टहलते हुए प्रेम मंदिर के दर्शन और फाउंटेन शो।

दूसरा दिन:

  • सुबह: जल्दी उठकर बांके बिहारी दर्शन (भीड़ से बचने के लिए)। फिर राधा रमण और निधिवन।
  • दोपहर: आराम और ब्रज की थाली।
  • शाम: केसी घाट पर यमुना आरती और थोड़ी खरीदारी (लोई, माला, पीतल की मूर्तियाँ)।

निष्कर्ष

वृंदावन वह जगह है जहाँ आप खुद को भूल जाते हैं। यहाँ की मिट्टी (रज) को लोग अपने माथे पर लगाते हैं। चाहे आप आस्तिक हों या नहीं, यहाँ की ऊर्जा आपको एक सकारात्मक बदलाव के साथ वापस भेजेगी। बस एक बात याद रखें—वृंदावन को दिमाग से नहीं, दिल से घूमें।

राधे-राधे!

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